।। शालिग्राम पूजान महात्म्य ।।
- Dec 7, 2017
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भक्तो की अनेक प्रकार की इच्छाये अपने ठाकुर जी के प्रति होती है, किसी भक्त ने इच्छा की, कि भगवान सगुण साकार बनकर आये तो भगवान राम, कृष्ण का रूप लेकर आ गये. किसी भक्त ने कहा मेरे बेटे के रूप में आये तो भगवान कश्यप अदिति के पुत्र के रूप में आ गए। किसी भक्त कि इच्छा हुई कि भगवान मेरे सखा बनकर आये, तो वृंदावन में सखा बनकर ग्वाल बाल के साथ खेलने लगे. किसी कि भगवान के साथ लडने की इच्छा हुई तो भगवान ने उसके साथ युद्ध किया. इसी प्रकार किसी भक्त की भगवान को खाने की इच्छा हुई तो भगवान शालिग्रामके रूप में प्रकट हो गए. जो नेपाल में पहाडो के रूप में होते है वहाँ एक विशेष प्रकार के कीड़े उन पहाडो को खाते है और वह पहाड़ टूट टूटकर टुकडो के रूप में गंडकी नदी में गिरते जाते है. नेपाल में गंडकी नदी के तल में पाए जाने वाले काले रंग के चिकने, अंडाकार पत्थर को शालिग्राम कहते हैं. इसमें एक छिद्र होता है तथा पत्थर के अंदर शंख, चक्र, गदा या पद्म खुदे होते हैं. कुछ पत्थरों पर सफेद रंग की गोल धारियां चक्र के समान होती हैं. इस पत्थर को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है तथा इसकी पूजा भगवान शालिग्राम के रूप में की जाती है. पुराणों में तो यहां तक कहा गया है कि जिस घर में भगवान शालिग्राम हो, वह घर समस्त तीर्थों से भी श्रेष्ठ है. इसके दर्शन व पूजन से समस्त भोगों का सुख मिलता है. भगवान शिव ने भी स्कंदपुराण के कार्तिक माहात्मय में भगवान शालिग्राम की स्तुति की है. प्रति वर्ष कार्तिक मास की द्वादशी को महिलाएं प्रतीक स्वरूप तुलसी और भगवान शालिग्राम का विवाह कराती हैं. तुलसी दल से पूजा करता है,ऐसा कहा जाता है कि पुरुषोत्तम मास में एक लाख तुलसी दल से भगवान शालिग्राम की पूजा करने से वह संपूर्ण दान के पुण्य तथा पृथ्वी की प्रदक्षिणा के उत्तम फल का अधिकारी बन जाता है. ऐसा कहा जाता है कि पुरुषोत्तम मास में एक लाख तुलसी दल से भगवान शालिग्राम की पूजा करने से समस्त तीर्थो का फल मिल जाता है मृत्युकाल में इसका जलपान करने वाला समस्त पापों से मुक्त होकर विष्णुलोक चला जाता है.






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