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मांग मे सिन्दूर लगाने का वैज्ञानिक तथ्य को जाने व कैसे पति की अकाल-मृत्यु को टाल सकती है औरत

  • Writer: Astro Mahesh Jyotishacharya Guru ji
    Astro Mahesh Jyotishacharya Guru ji
  • Sep 24, 2017
  • 4 min read

सिंदूर ;- भारत में हर हिन्दू धर्म की महिला जो शादी शुदा जिन्दगी व्यतीत करती हो .वह हमेशा अपनी मांग में सिन्दूर लगाती है. सिन्दूर महिला के शादीशुदा होने का प्रतिक भी है. आज कल के ज़माने में महिला भले ही छोटा लेकिन सिन्दूर ज़रूर लगाती है. यह पवित्र माना जाता है . जिसका उपयोग पूजा पाठ में भी करते है. सिंदूर लगाने की प्रथा हिन्दू धर्म में बहुत समय से चली आ रही है. और इसका उल्लेख हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथो में भी मिलता है. लेकिन मुख्यतः इस परम्परा का सबसे ज्यादा चलन रामायण युग से मिलाता है. हर हिन्दू धर्म में रामायण भी बहुत लोकप्रिय गाथा रही है . इस कथा के अनुसार जब सीता माता ने अपनी मांग में सिंदूर लगाया था. जब हनुमान जी भी वह उपस्थित थे .उन्होंने सीता माता को जब सिंदूर लगाते देखा तो उनसे , सिन्दूर को मांग में भरने का कारण पूछा. तब सीता माता ने कहा यह सिन्दूर भगवन श्री राम के लिए है ,यह सिंदूर उनकी प्रसन्नता के लिए है. और मांग में सिंदूर को लगाने से पति की उम्र बढ़ती है .और पति पतनी का रिश्ता और भी मजबूत होता है . सीता माता के कहे सिंदूर लगाने के वचन से , पुरे राज्य में यह बात फैल गयी और सिंदूर को शुभ माना जाने लगा . और वहा से यह प्रथा और भी आगे बढ़ने लगी .सिन्दूर सुहागन होना भी दर्शाता है इसलिए यह प्रथा को सभी लोगो ने सराहा . हिन्दू समाज में पति को परमेश्वर का दर्जा दिया गया है .इसलिए पति की प्रसन्नता और दीर्घायु के लिए भी सिन्दूर लगाया जाता है . सिंदूर से मांग भरने का वैज्ञानिक कारण महिलाये और पुरुष दोनों के शरीर की रचना अलग अलग है . महिलाये सिंदूर अपने मस्तक (सर ) के ऊपर ,सीमंत पर लगाती है . जिसे आम भाषा में मांग भी कहते है . पुरुषो के मुकाबले महिलाओ का यह भाग बहुत ही कोमल रहता है.क्युकी सिंदूर में अधिक मात्रा में पारा धातु पाया जाता है . जिससे शारीर की विद्युत उर्जा नियत्रण होती है और साथ ही साथ यह बाहर के दुष्प्रभावो को भी ढाल की तरह रोके रखता है और हानि होने से बचाता है. अत: वैज्ञानिक द्रष्टि में भी महिलाओ को सिंदूर लगाना लाभदायी ही है. 

कैसे होगी पति की लम्बी आयु 

यदि आप एक हिन्दू परिवार से हैं और एक विवाहित स्त्री भी हैं, तो सिंदूर का क्या महत्व होता है यह आपको समझाने की जरूरत नहीं है। हिन्दू परिवार की महिलाओं के लिए सिंदूर किसी भी अन्य वस्तु से बढ़कर है। सिंदूर के अलावा मंगलसूत्र भी उन्हें किसी भी अन्य मूल्यवान वस्तु से अधिक प्रिय है। महंगे से महंगे अभूषण भी उनके लिए मंगलसूत्र के आगे कम हैं। ये मान्यताएं और उनका विश्वास ही है, जो इन चीजों को इतना अधिक महत्व देता है। किंतु क्या आपने कभी सिंदूर के बारे में गहराई से जाना है? उसका इतना महत्व क्यों है और उसका प्रयोग विवाहित महिलाओं के लिए इतना आवश्यक क्यों है, इन सभी सवालों का जवाब ही सिंदूर को महत्वपूर्ण बनाता है। यह तो सभी जानते हैं कि हिन्दू महिलाओं के लिए सिंदूर सुहाग की निशानी होती है। इसे वह अपने पति की खुशी से जोड़ती हैं। विवाहित होकर भी सिंदूर ना लगाना अशुभ माना जाता है। सिंदूर उस महिला के लिए रिवाज और मान्यताओं के नाम पर भी जरूरी हो जाता है। किंतु आज हमारा सामना कुछ ऐसे तथ्यों से हुआ है जो कहते हैं सिंदूर क्यों और कैसे लगाया जाए, यह ध्यान देने योग्य बात है। मान्यताओं के अनुसार यदि पत्नी के मांग के बीचो-बीच सिंदूर लगा हुआ है, तो उसके पति की अकाल मृत्यु नहीं हो सकती है। माना जाता है कि यह सिंदूर उसके पति को संकट से बचाता है। एक अन्य मानयता के अनुसार जो स्त्री अपने मांग के सिंदूर को बालों में छिपा लेती है, उसका पति समाज में भी छिप जाता है। उसके पति को सम्मान दरकिनार कर देता है। इसलिए यह कहा जाता है कि सिंदूर लंबा और ऐसे लगाएं कि सभी को दिखे। एक और मान्यता के अनुसार जो स्त्री बीच मांग में सिंदूर लगाने की बजाय किनारे की तरफ सिंदूर लगाती है, उसका पति उससे किनारा कर लेता है। इन पति-पत्नी के आपसी रिश्तों में मतभेद ही बना रहता है। शायद इस मान्यता से आप पहले ही परिचित हो चुके होंगे, जिसके अनुसार यदि स्त्री के बीच मांग में सिन्दूर भरा है और सिंदूर भी काफी लंबा लगाती है, तो उसके पति की आयु लंबी होती है। शायद इस मान्यता से आप पहले ही परिचित हो चुके होंगे, जिसके अनुसार यदि स्त्री के बीच मांग में सिन्दूर भरा है और सिंदूर भी काफी लंबा लगाती है, तो उसके पति की आयु लंबी होती है। इस वजह से सुग्रीव ने बालि से काफी मार खाई और किसी तरह अपनी जान बचाते हुए वह श्रीराम के पास पहुंचा और यह सवाल किया कि उन्होंने बालि को क्यों नहीं मारा। जिस पर श्रीराम ने कहा कि तुम्हारी और बालि की शक्ल एक सी है, इसलिए मैं भ्रमित हो गया और वार ना कर सका। किंतु यह पूरी सच्चाई नहीं है। क्योंकि भगवान श्रीराम किसी को पहचान ना सकें, ऐसा नहीं हो सकता। उनकी दृष्टि से कोई नहीं बच सकता। असली बात तो यह थी कि जब श्रीराम बालि को मारने ही वाले थे तो उनकी नजर अचानक बालि की पत्नी तारा की मांग पर पड़ी, जो कि सिंदूर से भरी हुई थी। इसलिए उन्होंने सिंदूर का सम्मान करते हुए बालि को तब नहीं मारा। किंतु अगली बार जब उन्होंने यह पाया कि बालि की पत्नी स्नान कर रही है, तो मौका पाते ही उन्होंने बालि को मार गिराया। इसी कहानी के आधार पर यह मान्यता बनी हुई है कि जो पत्नी अपनी मांग में सिंदूर भरती है, उसके पति की आयु लंबी होती है। 

 
 
 

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